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Wednesday, 10 October 2012

मुफ़्त दुकान





क्या किताबों का पता पूछा आपने साहब ?
मुझसे.. ?

सरकारी अस्पतालों मे चले जाइये फ़िर
वहाँ हर बेड पर पडी
अलग अलग किताबें मिलेंगी ! साहब
हर रोज नयी-नयी प्रकाशित
लोकार्पित
कुछ जमीनों पर भी पडी मिलेंगी
आग में झौस दी गयी चित्कार कभी सुनी है आपने ?


चुपचाप बोलती सिसकती कराहती चित्कारती
जिन्दा अधमरी और मरने के कगार पर की कवितायें
चिताओं के अंगार पर की कवितायें
क्षणिकायें रिपोर्ताज और मुक्तक
क्या-क्या चाहिये आपको
बिखरे पडे दोहे चौपाईयां
सब मिलेगें
ढेर सारी कहानियाँ

डाक्टरों कम्पाउंडरों की गजलें बामुलाहिजा उम्दा शेर
अंदाजे बयाँ नर्सों की खनकती रुबाईयाँ
कविताओं की किताबों की खालिस मुफ़्त दुकान

किसने कैसे लूटा है कहाँ से
किसका का पैसा
कहाँ गया कहाँ का पैसा
कैसे छिपा बैठा है यहाँ पैसा
देखिये  कैसे खनकता है यहाँ पैसा
कैसे मचलता है रिरियाता है यहाँ पैसा
कैसे बनता हैं यहाँ पैसा
कैसे उजाडता है यहाँ पैसा
कैसे अंगार में जलता है यहाँ  पैसा
और कैसे रोता विलखता है यहाँ पैसा

मन भर जायेगा  आपका साहब
अघा जाओगें
पढते-पढते
एक साथ
देखते-देखते
अकबका जाओगे
नयन पट खुल जायेगें

कहाँ भटकते हो इन बनियों के पुस्तकों के मेले में ?
ख्वाहमख्वाह फ़िजूल पैसों के झमेलें में ?
वहाँ तुम्हे क्या मिलेगा ?
कही का कोई एक बना बनाया वाद गुट बहसबाजी
लफ़्फ़ाजी के वैचारिक व्यापार के सिवा
क्या करोगे उन कागजी पूलंदों के
फ़फ़ूंदो के
मकरंदों के ज्ञान का ?

क्या रिश्ता रहा है आजतक ? बतलाओ
इन गरीब दलित पीडित उपेक्षित
मसली कुचली जली
बेड पर पडी
खुली
अधखुली
किताबों का

तुम्हारे उस विश्व प्रसिद्ध पुस्तकों के
गोष्ठियों सम्मेलनों  का ?
मेलों के महान ज्ञान का ?
तुम्हारे बनाये संविधान का ?
तुम्हारे बनाये इस जहान का ?

---------शिव शम्भु शर्मा


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