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Tuesday, 12 February 2013

वाकपटु



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वाकपटु श्री वाचाल जी चाहते थे
कि हम उनकी हर बात मे जी--हुजुरी करते रहे
मित्र शब्द  का अर्थ-- उनकी नजर मे " चाटुकार " था

उनकी हाँ में हाँ मिलाकर
जो बनाये रखता हो  उन्हे साहित्यकार
और करता रहता हो सदा  उनकी जय जयकार

हमारे  स्वतंत्र उन्मुक्त साम्य विचारो का स्वाभिमान
उनके उपर उठने मे रोडा था शायद

खुदा करे वे  और भी
उठ जाए जमीन की सतह से उपर
ये दुआ है हमारी

हमारा क्या है
हम जमीन की ठोकर है
जन मजुर और नौकर है
हो जाएगा हमारा कही भी गुजर बसर ।
                  --------------------शिव शम्भु शर्मा ॥

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