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Tuesday, 5 February 2013

पता नही वह कौन है ?


पता नही वह कौन है ?
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ऎसा  नही है कि यह बडा जहाज अब डुबने से  बच जाए
सवार मैं भी हूं इस पर
एक बछडे की त्वचा के खोल में भरे भुसें की मानिंद खडा देखता

मर तो मैं उस दिन ही गया
जिस दिन इस जहाज पर धकेल  कर लाया गया था
अपने ही लोगो द्वारा जबरन  घसीट घसीट कर

जहाज के कानून के मुताबिक
धर्म संप्रदाय और जाति के विरूद्ध
बोलने और चलने के संगीन अपराध के   इलजाम पर

झाडु और पोछें की अहमियत एक ऎसी हिकारत है
जिसमें आदमी का होना    नही होना
एक बडे पर जहाज पर कोइ मायनें नही रखता

पानी में डुबी हुई उत्ताल लहरों के फ़व्वारों के कोहरों में छिपी
मुझे सामने दिख रही है बहुत  कडी -- कडी कट्टर पथरीली हत्यारी चट्टानें

मेरी आंखे खुली हुई है
और पुतलियों की तंग गलियों में एक फ़टी चटाई पर बस थोडी सी  चेतना जिन्दा है
मुंह पर पट्टियां बंधी हुई है
और पुरा देह जंजीरों से जकडा हुआ है
जहाज के मस्तुल पर के झंडे के नीचे
बेजुबान

हेली पैड से लैस
रडार और सोनार की केबिन में एक ताला लगा हुआ है

यात्री और कर्मचारियों का हुजुम  क्रुज की नृत्यांगना के नृत्य के बैंड की थाप पर मदहोश हैं
कौन कितना बेहतर नाचता है उनमें इस बात की होड है

एक दुसरे की टांग में लंगडी फ़साकर उसे गिरा देना और उसकी लाश पर नाचना
यहां प्रथम पुरस्कार माना जाता है

जहाज के मालिकाना कब्जें में साझेदारी और
जीतनें  वाले को सोने और हीरों से जडा मुकुट बतौर पुरस्कार दिया जाता  है

इस बात से बेखबर कि जहाज किस राह पर और  किधर चला जा रहा है

जिनके कांधे पर जहाज की जिम्मेवारी है
वे अपने अपने स्वर्ग समेटे गुटों में बंटे केबिनों में  अलग अलग थिरक रहे हैं

खाली बोतलों की तरह
लुढक चुके बेहोश कप्तान को  मै देख पा रहा हूं
बडे बडे हवा भरें ट्युब  छोटी नावें और हेलिकाप्टर रहने के बावजूद
मेरे सामनें फ़िर एक बार एक टाईटेनिक डुबने वाला है

मैं एक बेजुबान निरूपाय बंदी हूं
मेरी आंखो का मीठा पानी  इस खारें समुद्र मे अर्थहीन है
जहाज के साथ-साथ डुबना तय है मेरा भी

और मै यह  जानता हूं कि मेरा यह देखना समझना किसी काम का नही है
फ़िर भी पता नही वह कौन है ?
जो मेरे कान मे आकर चुपके से कहता है कि

एक जहाज के डुबने से पुरी सभ्यता समाप्त नही होती
फ़िर कोई न कोई जन्म लेगा गलत को गलत कहने की हिम्मत लिये

और यह भी कहेगा --
कि ऎसी बेहोशी और मदहोशियों से भरे लोगों का
देश देश नही रहता वह
समाप्त हो जाता है
हमेशा हमेशा के लिये ॥
-----------------------शिव शम्भु शर्मा ॥

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