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Thursday, 14 March 2013

कचरा



देखता हूं अक्सर
घंटों पूजा करती रहती हो तुम
ईश्वर के मंदिर में

यह सही है कि पूजा के लिये एक मुकम्मल जगह चाहिये
कचरें के ढेर पर रहकर पूजा का मन नही बनाया जा सकता है
अगर ईश्वर कचरे में नही रह सकता है

तो यह जान लो  यह भी  सच है कि
ईश्वर में कचरा भी नही रह सकता है ।
----------------शिव शम्भु शर्मा ।


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