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Friday, 15 March 2013

रहने दो


बहुत कुछ देख कर जान चुके अब
हमें अनजान बने रहने दो

अपने गम से  ही  गुमसुम सही
हमें गुमनाम बने रहने दो

तुम कमा लो  सारे जहाँ की नेक-नामियाँ
हमें बदनाम बने रहने दो

तुम मनाओ हर रोज ईद दिवाली और होली
हमें केवल रमजान रहने दो

तुम बन जाओ अमेरिका लंदन औ ईटली
हमें तो बस हिन्दुस्तान रहने दो

मेरी मुफ़लिसी के सच से उठाओ न तुम यूं परदा
बस इतना सा इत्मिनान बने रहने दो

तुमसें बतियानें का अब कहाँ बचा रहा मेरा शऊर
उजडा ही सही मगर  मुझे
अपने  कब्रिस्तान में बने रहने दो ।
-------------------शिव शम्भु शर्मा ।

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