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Wednesday, 13 March 2013

मैं


पुरी उम्र जग जीतने के बाद
अब उनके पांव कब्र में लटके हुए है
और खाट का चाँचर चिता पर रखा है

शनि का पुच्छला आखिरकर क्या है ?
क्या है ब्रह्माण्ड  ?
कहाँ तक फ़ैला हुआ  है ?
और क्या हैं पिंड  ?

यह सब जाने बगैर
एक पशु की तरह अज्ञानी से वे भी चले जा रहे है
अनजान पथिक की मानिन्द

और अब वे हो रहे है विलीन
उन्हें देखकर
शर्मिन्दा हूँ
मैं
------------------------शिव शम्भु शर्मा ।

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