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Sunday, 17 March 2013

क्यों है ?



मैं वह कलाकार नही हूँ
कि प्राण डाल दूं तराशे हुए पत्थरों की मूर्तियों में
और कह दूँ कि देखो यह ईश्वर है
और लोग अंधाधुंध  पूजने लगे
बगैर यह जाने समझें
कि ईश्वर कौन है
और है तो क्यों है ?

मै नही जानता आत्मा को भी
मैने इसे भी कभी नही देखा है
और जिसे अनुभव किया है
वह अवचेतन मन के सिवा कुछ भी नही है
यही तक मै अबतक पहुंच पाया हूं

मैं यह नही लिख सकता कि
सृष्टि से पहले भी मैं था
और आज भी मैं ही हूं
कल भी मैं ही रहुंगा

तुम नही समझ सकते मेरी बात
वो इसलिये कि तुमने अपनी आंखे बंद कर ली है

और यह मान बैठे हो कि
ग्रंथों में जो लिखा है वह सच है
क्योकि जन्मघुट्टी की तरह
यह अस्था तुम्हारे खून मे बहने के लिये छोड दिया गया है
हमेशा हमेशा के लिये

और तुमने सब मान लिया है
बगैर देखे बगैर समझे
मुझे माफ़ करना मै कलाकार नही हूं

एक अन्वेषी से ज्यादा कुछ नही मानता
खुद को
तुम नही समझ सकते मेरी पीडा
मेरे प्रश्न
मुझे माफ़ करना मेरे मित्रो ।
-----------------शिव शम्भु शर्मा ।

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