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Tuesday, 14 May 2013

हम


फ़िर वही दिन
वही रात
फ़िर वही तुम
वही हम
फ़िर वही फ़ुहारें
वही बिजली का तडकना
वही मौसम
कही कुछ कहाँ बदला ?
सब वैसे ही है
जैसे थे
अभी तक
टँगी हुई तस्वीरों सी
दीवारों में
ठहरी ठहरी
सहमी सहमी
आकुल
तुम्हारें आने की राह जोहती
प्रतीक्षारत ।
----शिव शम्भु शर्मा ।

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