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Tuesday, 14 May 2013

भोर


गाँव मवेशियों के तबेले में तब्दील हो गए
अब वहाँ आदमी नही रहते
और शहर की सडक पर हाँफ़ता भागता  है
भगदड सरीखा तेज शोर
रोबोट यांत्रिक मशीनो की चहलकदमी है बस
आदमी मर चुका है
ठहर चुकी है भोर ।
--------------शिव शम्भु शर्मा ।

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