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Sunday, 6 October 2013

पुनर्जन्म


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ओ हिन्दी के कमजोर ! मरियल फ़िसड्डीयों
कक्षा में सबसे पिछली बैंच पर बैठने वाले
सडी गली हड्डियों !

आज के हिन्दी के  पुरोधा बने कवियों !
पुनर्जन्म की मिथक अवधारणा के पोषकों

कविता में चमत्कार उत्पन्न करने वालो !
झूठे मक्कारों ! मैं तुम लोगो से पूछता हूँ
और तुम्हें पुरस्कृत करने वाले तुम्हारी बिरादरी से पूछता हूँ

बताओ आत्मा अगर अमर है तो  वह कहाँ गई ?
किसके शरीरों में समाहित है ?

भगत सिंह
चंद्रशेखर
सुभाष
सुखदेव
खुदीराम
बिस्मिल
जैसे तमाम अमर शहीदो की आत्माये ?
आत्मा तो अमर है न ! तो फ़िर कहाँ है ?
बताओ ?

देश में रौदे जा रहे लोग
बेखौफ़ घूमते लुटेरे

हत्या लूट गरीबी भ्रष्टाचार भूखमरी बेरोजगारी
चोरबाजारी जैसी रोज-रोज की लानत भरी खबरें
क्या तुम्हे सुनाई नही देती ?
कि दिखायी नही देती ?

घिनौने कुकर्मियों  बलात्कारियो का बेखौफ़ घूमना
जेल से छूटना
निकम्मी सरकार की बेचारगी भरी ऎसी भिखमंगी अवस्था क्यो है ?
---------------------शिव शम्भु शर्मा ।






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