स्वागत है आपका ।

Monday, 22 September 2014

संवेदना से संबधित नही है।

संवेदना से संबधित नही  है।
*************************
दर्शन भुगोल खगोल इतिहास विज्ञान  - वगैरह -वगैरह -वगैरह -वगैरह जैसे विषयों का संबंध
अगर आदमी से नही तो किससे है ?

कौन जानता समझता हैं इन्हें
कौन पढता लिखता गुनता बुनता हैं इन्हें

अब आदमी के नही तो फ़िर किसके मस्तिष्क की स्नायविक-उतकों की उर्जा से
संचारित होता है यह ?

बडा अजीब सा दायरा बनाया हुआ है  वह भी इसी आदमी का ही है
और कहते हो कि  यह कविता नही है दर्शन है भूगोल है फ़लां है ढकां है
यह जीवन से संबंधित नही है संवेदना से संबधित नही  है

कविता  को तुम किसी भी परिभाषा और परिसीमाऒं  में बाँध नही सकते हो !

मित्र ! कविता भील की आंखों में भी होती है
हाँ उसके पास वे शब्द और वह भाषा नही है जो तुम्हारे पास है
इसका मतलब यह नही कि उसके पास कविता नही है

यह अलग बात है कि तुम उसकी आँखों मे छुपी कविता पढ नही सकते
तुम नही समझ सकते उसे वो इसलिये कि तुम एक दायरे मे विश्वास करते हो
तुम जो समझते हो या जो तुम्हें अब तक समझाया गया है बस वही तुम समझ सकते हो

आसमान की असीम उचाईयों और झील की अतल गहरी गहराईयों  में
और उससे परें दुर-दुर तक फ़ैले नीरव में जहाँ तुम कभी नही पहुंच सकते
वहाँ भी कविता हो सकती है
इसे किसी नियत दायरों में बांधने की मुझे जरूरत नही महसूस होती
आगे तुम्हरी मरजी ।
----------------------------------श श श.।









No comments:

Post a Comment