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Friday, 15 June 2012

परवाह

तपती झुलसती गर्मी से बेचैन
रातों को ठीक से नही सो पाने
पंखे की गर्म हवा की शिकायत
और घमौरियों का रोना रोते

ग्लोबल वार्मींग  पर्यावरण
पर जीवन व पृथ्वी के लिये 
गंभीर चिन्ता प्रकट करते
शाम की उमस में अनुपयुक्त कुलर
और एसी के महत्व की बात
आपस में बतियाते 
बहस करते 
टहलते चले जा रहे थे 

सुबह बरसात की पहली हल्की
बारिश की बुँदा- बाँदी में
वही लोग भीगनें के डर से
रेनकोट और छतरी तानें
ड्युटी जा रहे थे

मैं भींगता जा रहा था
उनको देखता
मौसम कैसे बदलते हैं
और 
क्यों परवाह नही करते
किसी का ।
---------------------शिव शम्भु शर्मा ।

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