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Monday, 25 November 2013

अतीत


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मेरे रूकने  से कोई सडक नही  रूकती
और न सवारियां
करती है मेरा इंतजार

अपनी सीट जब्त करने से फ़ुर्सत कहाँ किसी को
कि  कोई क्षण भर  भी सोचे
मुझको

मै वही अतीत हूँ
जिसे पिछली रात यही हत्यारिन सडक निगल गई थी
मेरा लहू पोछ कर
और संवरकर
खडी है आज फ़िर से हसीन बनकर

यही दुनियाँ है और यही सडक है
हम नही है पर वही तडक- भडक है ।
------------------------शिव शम्भु शर्मा ।

Wednesday, 13 November 2013

सही में


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कोई किसी को याद नही करता
बस एक रस्म निभाई जाती है

तोते की तरह रटते
नल पर बैठते लोग
किसी को याद नही करते

अपने लाल होठों की नुमाइश करते है
जहाँ हर रोज
पर्दे पर एक -एक चेहरा आता है

वहाँ  किसी को याद करने का बोलो
आखिर क्या मतलब रह जाता है ?
--------------------शिव शम्भु शर्मा ।