स्वागत है आपका ।

Sunday, 19 May 2013

क्षुद्र अहं

क्षुद्र अहं
**************
किस-किस से कहाँ-कहाँ बहस करता फ़िरुं
अपनी बात पर अडिग रहकर
ऊँचा बोलकर
अपनी विद्वता के सही होने का
सबूत जुटाता रहुं

क्यो ?
किसके लिये ?
क्या उस क्षुद्र अहं के लिये

जो विशाल विस्तृत अंतहीन समय में
घडी की सुईयों की गति तक समझने में
असक्षम है
क्या उसके लिये ?
---------------शिव शम्भु शर्मा ।

No comments:

Post a Comment