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Thursday, 3 October 2013

मौलिक हक


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आजादी के पहले से ही
इस देश में योजनाओ की कई नदियाँ बहती है
कही नरेगा कही मनरेगा कही कुष्टरोग निवारण

तो कही बाढ आपदा नियंत्रण नदी
कही पशुओ के चारे की नदी
आदि-आदि

नहाकर धोकर ड्र्म में भर कर लगभग सभी ले जाते है
यही तो  लोक तंत्र का मौलिक हक है

लालु जी नए थे और गरीब तबके से आते थे
सो हहुआना वाजिब  था
नदी में मोटा पाईप लगवा बैठे
और सारा पानी अपने घर ले गए
नदी सूख गई
खबर बन गई
गलती बस यही हुई

वैसे अरबपति तो हो गए
बहुत नाम भी कमाया

और देखिये ये जेल वेल से क्या होता है ?
तेरह साल गुजर गया
आपने देखा ही
और आप यह भी देखेगें
जनाब बाहर निकलेगे
उपरी अदालत की कृपा बरसेगी
फ़िर आठ दस बरस निकल जाएगा
बेचारी नदी फ़िर बहेगी ।
------------------------शिव शम्भु शर्मा ।


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